BCCI की दादागिरी

BCCI में सुधार के लिए बनी लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को मंजूर कर सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति और अफसरशाही की मिली-भगत से चल रही मनमानी को लगाम लगाने के लिए जो दिशा-निर्देश दिए थे उनकी BCCI ने बड़ी बेशर्मी से अवहेलना की है।

सुप्रीम कोर्ट ने इसपर सख्त रुख दिखाते हुए कहा है कि”BCCI अगर नहीं सुधरा तो हम सुधार देंगे”। कोर्ट ने ये भी कहा है कि क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड भगवान की तरह बर्ताव कर रहा है अगर वह खुद को कानून से ऊपर समझ रहा है तो ये उसकी बड़ी ग़लतफ़हमी है।

कोर्ट ने  28 जुलाई को दिए अपने आदेश में कहा था कि एक व्यक्ति एक ही पद संभाले, एक राज्य एक ही वोट दे और मंत्री और अधिकारी को बोर्ड ने स्थान न मिले। पर बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशो की अवहेलना करके मनमाने तरीके से फैसले लिए हैं। 

कोर्ट ने खेलो के भले के लिए और खेल-संस्थाओं को नेताओं और अधिकारियों के शिकंजे से मुक्ति दिलाने के लिए खिलाडियों को ही खेल-संस्थाओ का मुखिया बनाये जाने की सिफारिश की थी।जिसे बोर्ड ने नहीं माना अब लोढ़ा कमिटी ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में बोर्ड के मुखिया अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को हटाये जाने की सिफारिश की है।

आज़ादी के बाद से ही इन खेल संस्थाओ पर नेताओ का दबदबा रहा है जिसका इस्तेमाल वो अपने निजी और राजनैतिक लाभ के लिए करते हैं। बढ़ते धन-बल के प्रभाव और लॉबिंग के चलते ये संस्थाये वर्तमान में एक अखाडा बन गई हैं जहाँ हर रोज़ एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश चलती रहती हैं।इन संस्थाओं की हिम्मत इतनी बढ़ गई हैं कि ये खुद को कानून से भी बड़ा समझने लगी हैं। ऐसी संस्थाओं पर तुरन्त कार्यवाही कर एक सख्त सन्देश देने की जरुरत है। जनता का खेलो और इनकी संस्थाओं से उठते विश्वास को पुनः स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार को भी कड़े कदम उठाने चाहिए।

कब तक सुप्रीम कोर्ट को बीच में आने का इंतज़ार जनता को करना पड़ेगा।सरकार भी  खेल संस्थाओ की पारदर्शी और निष्पक्ष कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेह है।अपने नेताओं के निजी स्वार्थों को दरकिनार कर सरकार को गंभीरता से भारत में खेलो के प्रति बेहतर माहौल बनाने के प्रयास करने होंगे नहीं तो जनता का सरकार और ऐसी संस्थाओ से भरोसा उठते देर नहीं लगेगी।

इन सब के बीच में सबसे ज्यादा नुकसान खेल और खिलाडियों का हो रहा है।कई प्रतिभाशाली खिलाडियों का भविष्य इन संस्थाओं के रवैये से ख़राब हो चुका है।अपनी आपसी खींचा तानी में बोर्ड सदस्य अपने प्यारो को अयोग्य होते हुए भी भारत की ओर से खेलने का मौका दे देते हैं जिससे भारत के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी होती है वो अलग।

BCCI में चली आ रही तमाम अनियमितताओं और राजनीति के चलते पहले ही इसकी बहुत बदनामी हो चुकी  है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आशा बंधी थी कि किये गए बदलावों से क्रिकेट-प्रेमियों का विश्वास पुनः इस संस्था पर बनेगा पर नतीजा शिफ़र ही निकला। खेलो में सुधार और खिलाड़ियों को जरुरी सुविधाएं और अनुकूल माहौल देने के लिए केंद्र सरकार को पहल करने की आवश्यकता है जिसके अभाव में अंतराष्ट्रीय स्तर पर सुधरना मुश्किल है। खेल के मैदानों में तिरंगा लहराते हुए देखने की चाह मन में ही न रह जाये इसके लिए हर स्तर पर प्रयास जरुरी हैं।

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