लाचार पुलिस..

लाचार पुलिस…

ब्यूरो ऑफ़ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट  (बीपीआरडी)  की हालिया रिपोर्ट में भारत के पुलिस बलो से सम्बंधित कई चौकाने वाले तथ्य सामने आएँ हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कई पुलिस थानो में वाहन, फोन और वायरलेस जैसी मूलभूत सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं हैं।

रिपोर्ट के अनुसार देश के पंद्रह हज़ार पाँच सौ पचपन पुलिस स्टेशनों में से एक सौ अठ्ठासी स्टेशन ऐसे हैं जहाँ कोई वाहन उपलब्ध नहीं है, चार सौ दो स्टेशन ऐसे हैं जहाँ कोई लैंडलाइन फ़ोन नहीं हैं वहीँ एक सौ अड़तीस स्टेशनों में वायरलेस सुविधा नहीं हैं।पैंसठ स्टेशन ऐसे हैं जहाँ न तो फोन है न ही वायरलेस की सुविधा।इसके अलावा सरकार लगभग तेईस लाख पुलिस जवानो में से केवल साढे पाँच लाख लोगो को ही सरकारी घर की सुविधा दे पा रही है।

जवानो की कमी के कारण पुलिस बलो पर काम का अत्यधिक बोझ है।देश में औसत सात सौ उनत्तीस लोगो पर एक जवान है।उत्तरप्रदेश, बिहार और दिल्ली में तो हालात और भी शोचनीय हैं यहाँ हर जवान के जिम्मे लगभग ग्यारह सौ लोग आते हैं।

काम का बोझ,छुट्टियों की कमी, अफसरों का दवाब, लम्बी ड्यूटी, असुरक्षा और भी कई तरह के दवाबो को झेलते इन पुलिस बलो को बिना मूलभूत सुविधाओं के कार्य करवाना अन्याय है।पुलिस बलो के जवानो को और भी कई परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है जिनमे पद के अनुसार सम्मानजनक कार्य न मिलना, राजनितिक दवाब,अफसरों का दुर्व्यवहार आदि।

डिजिटल इंडिया का राग अलाप रही सरकार को पुलिस को मूलभूत सुविधाओं से महरूम रखना राजनीति का दोहरा चरित्र ही सामने लाता है। पुलिस-सुधारो की सिफारिश कई स्तर पर होती रही है पर वास्तविकता में इसे कार्यान्वित करना सरकार की इच्छाशक्ति पर ही निर्भर करता है।

पुलिस बलो में नई भर्ती, कार्यस्थल पर अच्छा माहौल, नई तकनीक के हथियार और उपकरण,जीवन-रक्षक साधन, बेहतर प्रशिक्षण और दवाब झेलने के गुर सिखाने की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए जिससे पुलिस बल अपने कार्य को प्रभावी रूप से कर पाएं।

जगजाहिर ही है कि आजकल के अपराधी नई तकनीक के हथियार और उपकरण से लेस होते हैं जिनका सामना हमारे पुलिस बलो को पुराने हथियारों और उपकरणों से करना पड़ता है जिसमे कई बार उनको जान भी गवानी पड़ती है। पुलिस- सुधारो की माँग न्यायसंगत है और सरकार को चाहिए की प्राथमिकता से इस ज्वलन्त और गंभीर समस्या से निपटने के उपाय करे जिससे हमारे पुलिस बल भी आत्म-विश्वास से कार्य कर नागरिको को बेहतर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की गारंटी दे सके।

अश्वनी राघव

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4 thoughts on “लाचार पुलिस..

  1. पुलिस की नाकामी और भ्रष्टाचार के बारे में तो काफी लिखा जाता है लेकिन इन समस्याओं के बारे में नहीं. आपने अच्छा मुद्दा उठाया है. पुलिस reform की कमेटी के recommendations धूल खा रहे हैं.

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