दोहरे चरित्र वाली राजनीति !!

राजनीति का दोहरा चरित्र

राजनीतिक सुधारो की वकालत करने वाली अग्रणी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के अनुसार हाल ही में गठित जेडीयू-भाजपा गठबंधन की नवनिर्मित सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल पिचहत्तर फीसदी मंत्रियों पर अपराधिक मामले दर्ज़ हैं जिनमे से नौ मंत्रियों पर गंभीर अपराधिक मामले हैं। नवनिर्मित सरकार के उनत्तीस में से बाईस मंत्रियों पर अपराधिक मामले चल रहे हैं। पहले के जेडीयू-आरजेडी गठबंधन की सरकार में अठाइस में से उन्नीस मंत्रियों पर अपराधिक मामले चल रहे थे। सोशल मीडिया पर आ रही खबरो के अनुसार उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी पर भी भ्रष्टाचार का मामला दर्ज़ है। सवाल ये उठता है कि जब भ्रष्टाचार के आरोपो के चलते एक गठबंधन तोडा गया तो नए गठबंधन की सरकार में अपराधिक छवि के नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल क्यों किया गया?

कोई भी दल यदि ये कहे कि वह भ्रष्टाचार से खिलाफ है तो ये सबसे बड़ा झूठ है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण लोकपाल है जो वर्ष दो हज़ार तेरह में कानून बन चुका है पर चार वर्ष हो गये अभी तक लोकपाल की नियुक्ति नही हुई है। जब बिहार में भ्रष्टाचार के नाम पर सत्ता परिवर्तन हो रहा था ठीक उसी वक्त केंद्र सरकार पनामा पेपर लीक्स में सामने आए देश के लोगो पर चुप्पी लगाये बैठी थी। जहाँ पाकिस्तान और आइसलैंड जैसे देशो के प्रधानमंत्रियों को पनामा पेपर में नाम आने पर अपना पद गँवाना पड़ा वहीँ हमारे देश के सियासतदान इस मुद्दे पर अपने होंठ सिले रहे शायद इसीलिये कि इसमें अडानी के बड़े भाई, अमिताभ बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन जैसे नाम थे किसी विपक्षी दल के नेताओं के नाम नहीं थे। ये कैसी अंतरात्मा की आवाज़ है जो सिर्फ विपक्षी दलों के भ्रष्टाचार पर ही चीखती है वो भी वहाँ जहाँ खुद के हित सधते हो?

मध्यप्रदेश में नित नए घोटालो का खुलासा हो रहा है चाहे वह वन विभाग की जमीन पर कब्ज़े का मामला हो या सरकारी पैसो पर परिवार को विदेश घुमाने का मामला हो पर इन मामलो पर मीडिया में कोई बवाल नहीं मचता। व्यापम घोटाले में तो अब तक दर्जनों लोग अपनी जान भी गँवा बैठे हैं पर न तो किसी की अंतरात्मा जागी न ही किसी ने एकजुट होकर भ्रष्टाचार से लड़ने की अपील की।

जब अरबो रुपयों का क़र्ज़ दबाए बैठे उद्योगपतियों का नाम सार्वजनिक करने की बात होती है तो सरकार इन्कार कर देती है पर गरीब लोगो के घरो के बाहर ” मैं गरीब हूँ” का बोर्ड लगवाने में इन्हें कोई आपत्ति नहीं होती। दोहरा चरित्र और चेहरे वाली वर्तमान राजनीति में अगर कुछ बचा है तो वो सत्ता का लालच और स्वार्थसिद्धि। राजनीति के हमाम में सब नंगे हैं और एक दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हैं वो अलग बात है कि विपक्ष आजकल विपक्ष नही रहा अभी तो सत्ता और विपक्ष एक ही है।

अश्वनी राघव “रामेन्दु”

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7 thoughts on “दोहरे चरित्र वाली राजनीति !!

  1. बहुत सही है। राजनीति अौर भ्रष्टाचार मालुम नहीं कभी सुधरेंगें या नहीं।

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    1. सही कहा मधुसूदन जी, आजकल मुद्दों पर राजनीति नहीं होती बल्कि अपने स्वार्थ के लिये होती है। आपने किसी भी राजनीतिक पार्टी को चाहे वह सत्ता में हो या विपक्ष में बेरोजगारी को मुद्दा बनाते देखा है। पिछले दस वर्षों ने रोजगार सृजन दर सबसे कम है।रोज़गार बनाना तो दूर की बात 15 लाख लोग बेरोजगार हो चुके हैं पिछले दो सालो में।

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  2. बेहतर लिखा है भाई आपने. अपने लोकतंत्र में बहुत से परिवर्तन की सम्भावनाये हैं, पर उसके लिए राजनीतिक इक्षाशक्ति की आवश्यकता है. मैं इस बात से आहात नहीं हूँ की बिहार में जो कुछ भी घटा उसको नहीं घटना चाहिए, मेरे समझ में यह नहीं आ रहा कि जब आप जानते हैं की दूसरा दागदार है तो आप उससे मिले ही क्यों?
    राजनीति शायद वही है नीति है, जिसकी केवल सत्ता में काबिज़ होने के अलावा, वास्तविक्ता में कोई नीति नहीं है.
    ख़ैर मैं आपके पाकिस्तान वाले समानांतर रेखा खींचने से सहमत नहीं हूँ, पर मोटा मोटी काफी प्रभावशाली लिखा है आपने.

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    1. जी, प्रत्येक संवेदनशील नागरिक जो देश और समाज का विकास चाहता है वह कुछेक मुद्दों पर अवश्य सहमत होते हैं पर उससे ज्यादा जरुरी है असहमत होना। वास्तव में असहमति ही हमारे विकास का परिचायक है और लोकतंत्र का सार भी। निजी रूप से मैं नितीश जी को पसंद करता था पर जिस भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर उन्होंने गठबंधन तोडा और उससे भी बड़े भ्रष्टाचारी का दामन पकड़ा उससे ये साबित हो गया कि राजनीति में सबसे बड़ा स्वार्थ है।

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