ज़रूरी शर्त..

हत्याअगर सजातीय होया यूँ कहिएअपनो के बीच होतो ख़बर नही बनतीन अखबारों मेंन घरों मेंन  गली-मोहल्लों में, ख़बर बननेखलबली मचनेऔर … Continue reading ज़रूरी शर्त..

एक दिन ..

एक दिनचट्टान बनरोक लेंगीउन्मादियों कोकपकपातीं टांगे, एक दिनजोर से चींखेंगीबंद पड़ी जुबानेमाँगेंगीअपना हक़, एक दिनछीन लेंगेरहनुमाओं सेअपना हिस्साभूखे लोग एक … Continue reading एक दिन ..

धर्म..

उनका धर्मआपके धर्म सेसिर्फ़ इतना अलग हैजितनासियासत से भगवानजितनाहुल्लड़ से ध्यानजितनाहिंसा से प्यारजितनीफूल से तलवारजितनेअर्चना से नारेजितनेरक्षक से हत्यारेजितनीदान से … Continue reading धर्म..

अपने हिस्से का सूरज

सबके पास हैअपने हिस्से का सूरजजो उगेगाढलेगाफिर उगेगावो उगाएगा फसलेंफैलाएगा हरियालीजंगल भी जलाएगाकभी सिखाएगा नियमकभी गतिकभी केवल दिखेगावो चमकेगा तेज़आँखे … Continue reading अपने हिस्से का सूरज